Swiggy समेत देश की कई क्विक-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियों पर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से कंपनियों की डिलीवरी लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आने वाले समय में ग्राहकों और डिलीवरी पार्टनर्स दोनों पर पड़ने की आशंका है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद भारत में भी ईंधन दरों में वृद्धि दर्ज की गई है।
क्विक-कॉमर्स कंपनियां 10 से 30 मिनट के भीतर सामान पहुंचाने की सुविधा देती हैं, जिसके लिए बड़ी संख्या में डिलीवरी एजेंट लगातार सड़कों पर रहते हैं। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी भी कंपनियों के संचालन खर्च को काफी प्रभावित करती है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, डिलीवरी खर्च बढ़ने से कंपनियों को प्रति ऑर्डर अधिक लागत वहन करनी पड़ सकती है। इससे मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा, खासकर उन कंपनियों पर जो पहले से भारी प्रतिस्पर्धा और डिस्काउंट मॉडल के बीच काम कर रही हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रहती है तो कंपनियां ग्राहकों से अतिरिक्त डिलीवरी शुल्क वसूल सकती हैं। वहीं कुछ कंपनियां डिलीवरी पार्टनर्स को मिलने वाले इंसेंटिव और भत्तों में भी बदलाव कर सकती हैं। इससे डिलीवरी कर्मचारियों की आय और कामकाज की स्थिति प्रभावित होने की संभावना है।
कई कंपनियां अब इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी आधारित डिलीवरी सिस्टम की ओर तेजी से ध्यान दे रही हैं ताकि भविष्य में ईंधन लागत को कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में क्विक-कॉमर्स सेक्टर को टिकाऊ और कम लागत वाले मॉडल अपनाने होंगे। फिलहाल बढ़ती ईंधन कीमतों ने इस तेजी से बढ़ते उद्योग के सामने नई आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है।
