भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर वैश्विक बाजार संकेतों ने निवेशकों की धारणा प्रभावित की। कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स करीब 278 अंक गिरकर 77,450.64 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 57.65 अंक की गिरावट के साथ 24,230.45 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है। ब्रेंट कच्चा तेल 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश के आयात खर्च और मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी घरेलू बाजार पर असर डाला। अमेरिका के प्रमुख शेयर सूचकांक सोमवार को गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि मंगलवार को एशियाई बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। जापान का निक्केई करीब 1.6 प्रतिशत नीचे रहा। अमेरिकी बांड प्रतिफल में तेजी और वैश्विक निवेशकों के बीच बढ़ी जोखिम से बचने की प्रवृत्ति ने उभरते बाजारों पर भी दबाव बढ़ाया।
घरेलू बाजार में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों पर विशेष दबाव देखा गया। शुरुआती कारोबार में भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, इंटरग्लोब एविएशन, इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयर कमजोर रहे।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया की स्थिति, रुपये की चाल और वैश्विक ब्याज दरों से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। निवेशकों को फिलहाल उतार-चढ़ाव के बीच सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
