मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने निर्यात से प्राप्त विदेशी मुद्रा को भारत वापस लाने से जुड़ी पहले दी गई अतिरिक्त समय की छूट वापस लेने का फैसला किया है। इसके बाद निर्यातकों के लिए विदेशों से निर्यात आय को भारत लाने की समयसीमा फिर से नौ महीने रहेगी। यह बदलाव उस प्रस्तावित व्यवस्था के लागू होने से पहले किया गया है, जिसके तहत निर्यातकों को 15 महीने की अवधि मिलने वाली थी।
आरबीआई ने पहले जनवरी में जारी नियमों के तहत निर्यातकों को माल की भेजाई या सेवाओं के चालान की तारीख से 15 महीने के भीतर पूरी निर्यात राशि प्राप्त करने और उसे भारत वापस लाने की अनुमति देने की व्यवस्था की थी। यह व्यवस्था एक अक्टूबर से लागू होने वाली थी। अब केंद्रीय बैंक ने इस छूट को वापस लेते हुए नौ महीने की पुरानी समयसीमा को बरकरार रखा है।
निर्यात आय को भारत वापस लाने की प्रक्रिया विदेशी मुद्रा प्रबंधन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब निर्यातकों को विदेशों से भुगतान प्राप्त होता है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार उस राशि को भारत में अधिकृत बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से लाना होता है। इससे देश के विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर सहित अन्य विदेशी मुद्राओं की उपलब्धता बनी रहती है।
आरबीआई के इस फैसले का असर उन निर्यातकों पर पड़ सकता है, जो विदेशी ग्राहकों से भुगतान प्राप्त करने के लिए लंबी अवधि पर निर्भर रहते हैं। उन्हें अब निर्यात भुगतान की समयसीमा का अधिक सावधानी से पालन करना होगा।
इस फैसले का एक प्रमुख उद्देश्य घरेलू विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की उपलब्धता को बढ़ाना भी माना जा रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, कम समयसीमा से निर्यात आय जल्दी भारत लौट सकती है, जिससे विदेशी मुद्रा की तरलता को समर्थन मिल सकता है।
निर्यात क्षेत्र के लिए आने वाले समय में यह नियम महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि कंपनियों को अपने विदेशी ग्राहकों से भुगतान की योजना नौ महीने की समयसीमा को ध्यान में रखकर बनानी होगी।
