दिल्ली सरकार ने राजधानी में पारंपरिक कारीगरी और हस्तशिल्प को पुनर्जीवित करने तथा स्थानीय कारीगरों (Local Artisans) को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक नई नीति लाने की घोषणा की है। इस नीति के अंतर्गत कारीगरों को न केवल प्रदर्शन और विपणन (marketing) के लिए मंच मिलेगा, बल्कि उन्हें आर्थिक, तकनीकी और ब्रांडिंग से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
नीति के प्रमुख बिंदु:
स्थायी हाट और शिल्प मेले:
सरकार राजधानी के विभिन्न हिस्सों में स्थायी हाट (bazaar) और शिल्प मेलों का आयोजन करेगी, जहां कारीगर अपने उत्पाद सीधे जनता को बेच सकेंगे।ई-मार्केटप्लेस और डिजिटल प्रशिक्षण:
कारीगरों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए डिजिटल ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे अपने उत्पाद Amazon, Flipkart, GeM आदि पर बेच सकें।ब्रांडिंग और पैकेजिंग सपोर्ट:
दिल्ली सरकार स्थानीय उत्पादों को आकर्षक रूप देने के लिए ब्रांडिंग और आधुनिक पैकेजिंग में मदद करेगी।ब्याज रहित ऋण (Interest-Free Loans):
आर्थिक सहायता के लिए स्वयं सहायता समूहों और व्यक्तिगत कारीगरों को ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।स्कूलों और कॉलेजों में वर्कशॉप्स:
नई पीढ़ी को स्थानीय शिल्प से जोड़ने के लिए शैक्षिक संस्थानों में कारीगरों के साथ वर्कशॉप्स आयोजित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री का बयान:
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस नीति की घोषणा करते हुए कहा:
“दिल्ली में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही मंच और समर्थन की ज़रूरत है। यह नीति न केवल पारंपरिक कारीगरी को बचाएगी, बल्कि हमारे कारीगरों को आत्मनिर्भर भी बनाएगी।”
इसके लाभ:
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा
कारीगरों की आजीविका में सुधार
‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा
महिला और ग्रामीण कारीगरों के लिए अधिक अवसर
