दिल्ली में खाद्य सुरक्षा विभाग की सैंपलिंग अभियान रिपोर्ट में देरी के कारण अप्रभावी साबित हो रहा है। होली पर लिए गए 66 नमूनों की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही मिलावटी खाद्य सामग्री बाजार में बिक जाती है।

प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि त्योहार के दौरान ही मिलावटी खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग क्यों होती है और जब सैंपलिंग के बाद भी संबंधित खाद्य पदार्थ की बिक्री जारी रहती है तो अभियान का औचित्य क्या?
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नियमों के कारण अधिकांश मामलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा सैंपल लेने के बाद संबंधित खाद्य पदार्थों की बिक्री तुरंत नहीं रोकी जाती। सैंपल को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाता है और आगे की कार्रवाई प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर होती है। रिपोर्ट आती है 14 से 30 दिन बाद, ऐसे में यदि किसी सैंपल में मिलावट या मानकों का उल्लंघन पाया भी जाता है, तो तब तक वह खाद्य सामग्री बाजार में बिक चुकी होती है और उपभोक्ता उसे उपयोग कर चुके होते हैं।
