पंजाब और हरियाणा की सीमा पर स्थित खनौरी में किसानों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। किसान संगठनों ने दिल्ली तक पैदल मार्च करने का आह्वान किया है। किसानों का कहना है कि वे सीमित संख्या में शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से दिल्ली पहुंचकर अपनी मांगों को केंद्र सरकार के सामने रखना चाहते हैं। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा सरकार से अपील की है कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए।
किसानों की प्रस्तावित पदयात्रा दाता सिंह वाला-खनौरी सीमा से शुरू होकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचने की योजना है। किसान संगठनों के अनुसार लगभग 228 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में 51 किसान पूरी दूरी पैदल तय करेंगे। बड़ी संख्या में अन्य किसान और समर्थक भी यात्रा में सहयोग करेंगे। किसानों ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बनाए रखने की बात कही है।
इस आंदोलन के पीछे कई कृषि संबंधी मांगें हैं। किसानों की प्रमुख मांगों में सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, किसानों और खेत मजदूरों से जुड़े मुद्दों का समाधान, कर्जमाफी तथा पेंशन जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा प्रस्तावित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर भी किसान संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र पर समझौते के संभावित प्रभावों को लेकर सरकार को किसानों की आशंकाओं का समाधान करना चाहिए।
किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद हरियाणा प्रशासन ने खनौरी सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी है। पुलिस ने सीमा पर भारी बैरिकेडिंग की है और किसानों को हरियाणा में प्रवेश कर दिल्ली की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मार्च के लिए आवश्यक अनुमति नहीं मिली है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
फिलहाल किसान खनौरी सीमा पर डटे हुए हैं और अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने की अनुमति की मांग कर रहे हैं। प्रशासन और किसान संगठनों के बीच स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।
