अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने हिरासत में मौत के मामले में एफआइआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि प्राथमिकी के लिए सीधे हाई कोर्ट न आएं। न्यायमूर्ति डीएन राय ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत पहले पुलिस के पास जाएं।
यदि पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं करती है तो आपके पास मजिस्ट्रेट के पास जाने का कानूनी रास्ता खुला है। न्याय के लिए पहला दरवाजा पुलिस है। वहां सुनवाई न हो तो मजिस्ट्रेट के पास जाएं। ललिता कुमारी केस का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञेय अपराध में एफआइआर को जरूरी बताया है, लेकिन एफआइआर न लिखे जाने पर क्या उपाय हो, यह नहीं बताया।

