नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी को लेकर इस वर्ष तिथि और पूजा के समय को लेकर लोगों के बीच बना भ्रम अब दूर हो गया है। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का मुख्य पर्व 14 सितंबर को मनाया गया। हालांकि, चतुर्थी तिथि 15 सितंबर की सुबह तक रहने के कारण कई लोगों के बीच पर्व की तारीख को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आ रही थी। धार्मिक मान्यताओं और पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा और स्थापना का विशेष महत्व माना जाता है।
गणेश चतुर्थी पर देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा की। घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश को मोदक, लड्डू और विभिन्न प्रकार के प्रसाद अर्पित किए। पूजा के दौरान गणेश मंत्रों का जाप और आरती की गई।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान, समृद्धि और शुभता का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में लंबे समय से चली आ रही है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी का पर्व धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
इस वर्ष तिथि की गणना को लेकर लोगों में इसलिए भ्रम रहा क्योंकि चतुर्थी तिथि 14 सितंबर से शुरू होकर अगले दिन सुबह तक रही। ऐसे में अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय परंपराओं के कारण कुछ लोगों को तारीख को लेकर असमंजस हुआ। हालांकि, प्रमुख धार्मिक गणना के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया गया।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और देश के अन्य राज्यों में विशेष आयोजन हुए। मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन भी किए गए।
पर्व के बाद अब श्रद्धालु गणपति विसर्जन की तैयारियों में जुटेंगे। अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय परंपरा के अनुसार विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
