नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ को आम लोगों का मौलिक अधिकार बताया है, जिस पर वे चल सकते हैं। लेकिन राजधानी में फुटपाथ अतिक्रमण के आगे गायब हो गए हैं।

प्रशासन दावा करता रहता है कि फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा है। लेकिन इच्छाशक्ति कितनी है, इसका अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है कि हर साल हजारों वर्ग किलोमीटर फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने के दावे के बाद भी ये मुक्त नहीं हो पाए हैं। जिसकी वजह से हर वर्ष सैकड़ों लोगों की जान जा रही हैं।
बीते चार वर्षों में 2524 राहगीरों की जान जा चुकी है। जिसकी बड़ी वजह यह सामने आती है कि फुटपाथ पर अवैध दुकान, रेहड़ी पटरी से लेकर सरकारी पुलिस बूथ, मोहल्ला क्लीनिक जैसे निर्माण किए हैं। जिसकी वजह से लोगों को पैदल चलने के लिए स्थान नहीं मिलता और जब लोग सड़क किनारे चलते हैं तो लोगों की जान चली जाती है।
