तेहरान : ईरान और अमेरिका के बीच जारी महायुद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने शुक्रवार को अमेरिका के बेहद ताकतवर F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराने का सनसनीखेज दावा किया है। इस खौफनाक घटना के बाद से एक अमेरिकी पायलट ईरान की जमीन पर लापता हो गया है, जिसकी तलाश में ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दिन-रात एक कर दिया है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि अमेरिकी सेना अपने लापता जवान को खोजने के लिए जद्दोजहद कर रही है, वहीं ईरान ने उसे पकड़ने या मारने वाले के लिए एक बड़े इनाम का ऐलान कर दिया है, जिससे अमेरिका की चिंताएं सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं।

लापता अमेरिकी पायलट पर 55 लाख का बंपर इनाम
ईरानी प्रशासन किसी भी कीमत पर इस अमेरिकी पायलट को अपने कब्जे में लेना चाहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि अगर कोई दुश्मन के इस सैनिक को जिंदा पकड़ता है या मार गिराता है, तो उसे मालामाल कर दिया जाएगा। कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के गवर्नर ने अमेरिकी पायलट को पकड़कर सौंपने वाले को 10 अरब तोमान यानी करीब 55 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम देने की घोषणा की है। यह ऐलान अमेरिका के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य चुनौती बन गया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन पर भी हुई ताबड़तोड़ फायरिंग
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस दुर्घटनाग्रस्त F-15E विमान में दो पायलट सवार थे। इनमें से एक पायलट को शुक्रवार को ही सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन दूसरे पायलट की तलाश अभी भी जारी है। शुक्रवार को लापता पायलट को खोजने के लिए अमेरिका ने अपने रेस्क्यू हेलिकॉप्टर और अन्य विमान भेजे थे, लेकिन ईरान की तरफ से उन पर भी ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। हालांकि, अमेरिकी विमान किसी तरह सुरक्षित बच निकलने में कामयाब रहे। इसके अलावा ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक और A-10 विमान को निशाना बनाया है, जो कुवैत में जाकर क्रैश हो गया, हालांकि उसका पायलट समय रहते सुरक्षित बाहर निकल गया।
23 साल बाद सुपरपावर अमेरिका को लगा सबसे बड़ा झटका
ईरान की इस आक्रामक कार्रवाई को अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा सैन्य झटका माना जा रहा है। सैन्य जानकारों का कहना है कि पिछले 23 सालों के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी युद्ध के दौरान अमेरिका के किसी लड़ाकू विमान को दुश्मन ने इस तरह मार गिराया हो। इससे पहले साल 2003 में इराक युद्ध के दौरान ऐसी घटना देखने को मिली थी। अब अमेरिकी प्रशासन को सबसे बड़ा डर यह सता रहा है कि अगर उनका लापता पायलट ईरान के हाथ जिंदा लग गया, तो उसे बंधक बनाया जा सकता है, जिससे यह युद्ध और भी ज्यादा खौफनाक रूप ले लेगा।
ईरान का तंज और अमेरिका के अंदर उठते बगावती सुर
इस पूरी घटना के बीच ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की जो जंग सत्ता परिवर्तन के लिए शुरू हुई थी, वह अब सिर्फ अपने एक लापता पायलट की तलाश तक सिमट कर रह गई है। इस बीच, खुद अमेरिका के अंदर भी इस युद्ध को लेकर गहरे मतभेद सामने आने लगे हैं। कई नेता और अधिकारी जमीनी हमले का विरोध करते हुए इराक और वियतनाम युद्ध की पुरानी गलतियों की याद दिला रहे हैं। हालांकि, इन विरोधों के बावजूद अमेरिका ने हजारों सैनिकों को मिडिल ईस्ट में भेज दिया है, जिससे आने वाले दिनों में ग्राउंड ऑपरेशन की आशंका भी काफी बढ़ गई है।
