गुरुग्राम। कंबोडिया और फिलिपींस सिंडिकेट की ओर से गुरुग्राम में चलाए जा रहे ठगी के अड्डों से प्रतिदिन करीब चार लाख 80 हजार काल साइबर ठगी के लिए देशभर के लोगों को जा रहे थे।
गुरुग्राम में तीन महीने पहले कई जगहों पर 15 सिम बाक्स का सेटअप किया गया था। साइबर पुलिस सूत्रों के मुताबिक पकड़े गए आरोपितों से जांच में पता चला कि उन्होंने इन तीन महीनों में करीब 20 करोड़ की राशि क्रिप्टो में कन्वर्ट कर भारत से विदेशी सिंडिकेट को भेजी।

साइबर पुलिस के अनुसार विदेशी सिंडिकेट ने एक अलग तरह की मशीन तैयार की, जिसमें एक साथ 32 सिम काम कर सकते थे। गुरुग्राम से जिन 15 सिम बाक्स को बरामद किया गया। इन सिम बाक्स में कुल 480 सिम पड़े हुए थे। इन्हें एक मोबाइल एप से चलाया जा रहा था।
एक सिम से आटोमेटिक तरीके से प्रतिदिन करीब एक हजार काल जा रहे थे। यह आइवीआरएस काल रैंडम और करीब 15 से 20 सेकेंड के होते थे। व्यक्ति की प्रतिक्रिया होने पर सिम बाक्स से उसकी काल सीधे विदेश से कनेक्ट हो जाती थी।
विदेश से बैठ कर हो रही था मॉनीटरिंग
ऐसे में 15 सिम बाक्स में पड़े 480 सिम के माध्यम से प्रतिदिन देशभर के करीब चार लाख 80 हजार लोगों को ठगी के लिए काल जा रहे थे। इनकी मानीटरिंग विदेश में बैठे ठगों द्वारा की जा रही थी। यह सिम बाक्स सुबह आठ बजे एक्टिव होते थे और शाम साढ़े पांच बजे अपने आप बंद हो जाते थे।
मानना है कि कंबोडिया में किसी काल सेंटर पर बैठे साइबर ठग इस दौरान ड्यूटी आवर में होते थे। कंबोडिया का समय भारतीय समय से करीब ढाई घंटे ज्यादा है। अगर यहां आठ बजे सिम बाक्स शुरू होते थे, इसका मतलब कंबोडिया से कोई व्यक्ति इन्हें वहां के समय के अनुसार करीब साढ़े दस बजे शुरू करता था।
बीच में दो घंटे कालिंग बंद होती थी। गुरुग्राम में छापेमारी के दौरान पुलिस ने इसकी प्रक्रिया भी समझी। इस दौरान देखा गया कि करीब दो सौ से ढाई सौ काल कुछ देर में किए गए। करीब 10 काल पांच मिनट के रहे। यानी उस दौरान करीब 10 लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया।
आरोपितों को दो प्रतिशत कमीशन मिला
साइबर पुलिस ने देशभर में छापेमारी के बाद बीते दिनों अहमदाबाद के यश अमृत सिंह, कच्छ की भाविका, जलगांव जिले के लितेश और सागर को पकड़ा था। भाविका विदेशी सिंडिकेट के लिए तीन काम कर रही थी।
पहला, वह विदेश में जिन सिमों के माध्यम से ठगी की जा रही थी, उनका रिचार्ज करती थी। दूसरा, भारतीय युवाओं को साइबर ठगी के शामिल होने के लिए कंबोडिया भेजती थी। तीसरा, भारत में ठगी से मिलने वाली राशि को क्रिप्टो में कन्वर्ट कर सिंडिकेट को भेजती थी।
साइबर पुलिस सूत्रों के अनुसार भाविका ने इन तीन महीनों में करीब 20 करोड़ की राशि विदेशी सिंडिकेट को भेजी। यह भी पता चला कि आरोपितों को ठगी की राशि में से दो प्रतिशत कमीशन मिलता था।
