देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से कई राज्यों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत पुलिस, साइबर सेल और संबंधित सरकारी विभाग लोगों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी, सोशल मीडिया फ्रॉड और पहचान चोरी जैसे साइबर अपराधों से बचने के बारे में जानकारी दे रहे हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए जागरूक करना है।
अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना, केवाईसी अपडेट के नाम पर ओटीपी मांगना, सोशल मीडिया अकाउंट हैक करना, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करना और नकली वेबसाइटों के जरिए लोगों की निजी जानकारी चुराना इन अपराधों के प्रमुख तरीके हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए पुलिस विभिन्न माध्यमों से लोगों तक सुरक्षा संबंधी संदेश पहुंचा रही है।
जागरूकता अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर सेमिनार, कार्यशालाएं और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी साइबर सुरक्षा संबंधी संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपनी बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइटों एवं मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि वे किसी साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना बेहद आवश्यक हो गया है। उनका मानना है कि तकनीकी सतर्कता, सही जानकारी और समय पर शिकायत ही साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे मजबूत माध्यम है।
