फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की बैठक के बीच हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और विभिन्न वैश्विक तथा स्थानीय मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की भी खबरें सामने आई हैं।
प्रदर्शनकारियों ने जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता, श्रमिक अधिकारों, महंगाई और वैश्विक नीतियों से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाई। विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और श्रमिक यूनियनों ने रैलियां और मार्च आयोजित किए। उनका आरोप है कि वैश्विक नेताओं द्वारा लिए जाने वाले कई फैसलों का आम लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और इन नीतियों में जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सम्मेलन स्थल और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। हजारों पुलिसकर्मियों और सुरक्षा अधिकारियों को तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। हालांकि कुछ स्थानों पर प्रदर्शन उग्र हो गए, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष कदम उठाने पड़े। झड़पों के दौरान कई लोगों के घायल होने और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी खबर है।
फ्रांसीसी प्रशासन ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था भंग करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं प्रदर्शनकारी संगठनों ने दावा किया कि उनका उद्देश्य अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से वैश्विक नेताओं तक पहुंचाना था।
G7 सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है। ऐसे में सम्मेलन के समानांतर हुए ये प्रदर्शन दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं और यह दिखाते हैं कि वैश्विक नीतियों को लेकर आम जनता की चिंताएं भी लगातार बढ़ रही हैं।
