नई दिल्ली। आज के समय में स्मार्टवाच, स्मार्ट रिंग, फिटनेस ट्रैकर जैसे अनेक वियरेबल्स केवल कदमों की संख्या ही नहीं बताते, बल्कि ‘मिनी क्लीनिक’ के तौर पर हर समय हमारी सेहत पर नजर भी रखते हैं। आप कितने कदम चलते हैं, रात की नींद कैसी रही, ब्लड ऑक्सीजन, तनाव, रिकवरी, वर्कआउट और कार्डियो फिटनेस की स्थिति, सब कुछ इनसे जान सकते हैं। सेहत के प्रति जागरूक वयस्कों और क्रोनिक हेल्थ समस्याओं का सामना कर रहे लोगों के लिए ये भरोसेमंद मार्गदर्शक हैं, पर हर समय वियरेबल्स के डेटा पर नजर रखना, संभावित लक्षणों और उपचार को लेकर चिंता पालना भी एक मुसीबत है। जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के एक अध्ययन के अनुसार इन आदतों के चलते लोग अब चिंता और अवसाद की गिरफ्त में भी आने लगे हैं।

इससे तनाव, थकावट और शारीरिक सेहत की समस्याएं बढ़ सकती हैं। कुछ लोग जरूरत नहीं होने पर भी स्मार्टवॉच से ईसीजी मापते हैं। लक्षण नहीं महसूस होने पर भी दिन में कई बार हार्ट रेट चेक करते हैं, इससे एंग्जाइटी होना स्वाभाविक है। इतना ही नहीं, वियरेबल्स के हेल्थ डेटा के आधार पर कुछ लोग आनलाइन सर्च भी करने लगते हैं या एआई चैटबॉट से सेहत के बारे में जानना चाहते हैं। ऐसे में क्या हेल्पफुल है, क्या हार्मफुल, इसके बीच भेद करना मुश्किल हो जाता है। बीएमजे के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, लोकप्रिय एआई चैटबॉट की मेडिकल सलाह अक्सर 50 प्रतिशत तक गलत होती है।
