बरसात के मौसम में जलजनित और संक्रामक बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों को सतर्क रहने तथा आवश्यक एहतियाती उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य डायरिया, हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए, लेप्टोस्पायरोसिस और अन्य जलजनित रोगों के प्रसार को रोकना तथा लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
एडवाइजरी के अनुसार, नागरिकों को केवल स्वच्छ और उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पीने की सलाह दी गई है। खुले में रखे भोजन, कटे हुए फलों और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों के सेवन से बचने की अपील की गई है। लोगों से भोजन करने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्थानीय प्रशासन को पेयजल स्रोतों की नियमित जांच, पानी की गुणवत्ता की निगरानी और आवश्यकतानुसार क्लोरीनेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। नगर निकायों को जलभराव वाले क्षेत्रों की सफाई, नालियों की नियमित देखरेख और कचरे के समय पर निस्तारण की व्यवस्था मजबूत करने के लिए कहा गया है। अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी आवश्यक दवाओं, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), जीवनरक्षक दवाओं तथा पर्याप्त चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्रालय ने यह भी कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, दस्त, उल्टी, पेट दर्द या निर्जलीकरण जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए। समय पर उपचार मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती है। इसलिए साफ-सफाई, सुरक्षित पेयजल, संतुलित भोजन और स्वास्थ्य संबंधी सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्वास्थ्य सलाह का ही पालन करें, ताकि मानसून के दौरान जलजनित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
