2025 में, दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएँ कई तरह के झटकों, अस्थिरताओं और वैश्विक चुनौतियों से गुजर रही हैं — चाहे वह कोरोना‑पश्चात की रिकवरी हो, ऊँचे कर्ज का बोझ हो, व्यापार तनाव हो, या भू-राजनीतिक संघर्ष हो। इसके बावजूद, कई अर्थशास्त्रियों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने अपेक्षाओं से बेहतर लचीलापन दिखाया है। लेकिन इस लचीलापन के बीच कई जोखिम छिपे हैं, जिन्हें अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है।
नीचे हम इन दोनों पहलुओं — लचीलापन एवं जोखिम — का संयुक्त विश्लेषण करेंगे।
1. लचीलापन: संकेत और उपादान
1.1 IMF की रिपोर्ट और आंकड़े
IMF की जुलाई 2025 की World Economic Outlook Update के अनुसार, वैश्विक विकास दर 2025 में लगभग 3.0 % रहने की उम्मीद है, और 2026 में यह बढ़कर 3.1 % हो सकती है।
इसके पीछे कारण हैं: कई देशों में वित्तीय स्थितियों में सुधार, अनुकूल मौद्रिक नीतियाँ और व्यापार संसाधनों का बेहतर उपयोग।
IMF के Global Financial Stability Report (GFSR) अप्रैल 2025 में चेतावनी देते हैं कि वित्तीय स्थिरता को लेकर चुनौतियाँ बढ़ी हैं, पर साथ ही यह भी कहता है कि हालिया झटकों के बीच अर्थव्यवस्था में स्थिरता बने रहने की कुछ क्षमता दिख रही है।
1.2 संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और समीक्षा
संयुक्त राष्ट्र की World Economic Situation and Prospects (WESP) 2025 रिपोर्ट कहती है कि, “वैश्विक अर्थव्यवस्था ने कई आपस में जुड़े झटकों का सामना करते हुए लचीलापन दिखाया है।”
लेकिन वह यह भी चेतावनी देती है कि विकास दर अभी भी महामारी से पहले की औसत दर से कम है (लगभग 3.2 %) और निवेश, उत्पादकता और कर्ज़ भार सीमित करने वाले कारक बने हुए हैं।
1.3 आर्थिक रिपोर्टों और विश्लेषणों की पुष्टि
Citi Research का विश्लेषण कहता है कि, यद्यपि अमेरिका, यूरो क्षेत्र और चीन में गतिविधि धीमी हुई है, लेकिन इस मंदी को “अस्थिर प्याज़” के रूप में देखा जाना चाहिए — यानी पूरी गिरावट नहीं, बल्कि कुछ कमी के बाद अर्थव्यवस्था वापस संभल सकती है।
दूसरे विश्लेषण बताते हैं कि व्यापार पॉलिसी में अनिश्चितता घटने, वित्तीय स्थितियों में थोड़ी सुधार और प्राथमिक क्षेत्रों में निवेश जारी रहने से वैश्विक अर्थव्यवस्था “टकरावों को झेल सकती है।”
2. जोखिम बने हुए हैं: किन क्षेत्रों में खतरा
लचीलापन के बावजूद, कई जोखिम ऐसे हैं जो अंगड़ाई लेने पर दबाव डाल सकते हैं। नीचे प्रमुख जोखिम और चुनौतियाँ हैं:
2.1 सार्वजनिक और निजी कर्ज़ का बोझ
कई देशों में सरकारी एवं निजी कर्ज़ का स्तर बेहद ऊँचा है — यह वित्तीय प्रणाली की क्षमता को रक्षा स्थिति में धकेल सकता है।
GFSR रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि उधारी की अधिकता, विशेषकर उन देशों में जहां राजस्व कम है, बड़े देशों की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।
2.2 वित्तीय अस्थिरता और वैल्यूएशन जोखिम
बाजारों में संपत्ति की कीमतें (asset valuations) कई जगह ऊँची हैं — यदि बाजार में झटका आए, तो बड़े गिराव की आशंका है।
कुछ अत्यधिक ऋणग्रस्त वित्तीय संस्थानों और उनके बैंकों के साथ संबंध (leverage, interconnectedness) वैश्विक वित्तीय प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।
2.3 व्यापार तनाव और संरक्षणवाद
दुनिया भर में व्यापार तनाव (trade tensions) और नए शुल्क (tariffs) की आशंका बनी हुई है।
WTO ने अपनी व्यापार विकास पूर्वानुमान को 2026 के लिए सिर्फ 0.5 % कर दिया है।
क्षेत्रीय और द्विपक्षीय व्यापार समझौते प्रभावित हो सकते हैं यदि सुरक्षा चिंताएँ और राजनयिक तनाव बढ़ें।
2.4 भू‑राजनीतिक और संघर्ष जोखिम
वैश्विक स्तर पर संघर्ष, राष्ट्रों के बीच तनाव और सैन्य संघर्षों का जोखिम बढ़ रहा है। WEF की Global Risks Report 2025 में यह प्रमुख चुनौती के रूप में उभरा है।
तकनीकी (cyber) हमले, सूचना युद्ध (misinformation), और कोविड जैसे स्वास्थ्य संकट फिर से उभर सकते हैं।
2.5 विकासशील देशों की संवेदनशीलता
कमजोर आर्थिक संरचनाएँ, सीमित वित्तीय संसाधन और बाहरी ऋण दबाव (external debt stress) विकासशील देशों को अधिक प्रभावित कर सकते हैं।
विशेष रूप से निर्यात‑आधारित अर्थव्यवस्थाएँ व्यापार बाधाओं और वैश्विक मांग में कमी से प्रभावित हो सकती हैं।
2.6 अन्य जोखिम: जलवायु, तकनीकी, आपदाएँ
जलवायु परिवर्तन से जुड़े आपदाएँ (बाढ़, सूखा, तूफान) आर्थिक गतिविधियों को बाधित कर सकती हैं। WEF रिपोर्ट में यह एक लंबी अवधि का मुख्य जोखिम माना गया है।
तकनीक और सूचना असमुल्य—अविश्वास (misinformation), साइबर हमले, AI आधारित व्यवधान — ये जोखिम बढ़ रहे हैं।
3. क्षेत्रीय दृष्टिकोण और उदाहरण
3.1 भारत का अनुभव
RBI की रिपोर्ट कहती है कि, “वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी अच्छे मैक्रो-आधारों पर खड़ी है।”
लेकिन यदि वैश्विक विकास दर 100 आधार अंक (bps) से घटती है, तो भारत की ग्रोथ को लगभग 30 bps का प्रभाव पड़ सकता है।
3.2 व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला
OECD और अन्य संस्थाएँ चेतावनी दे रही हैं कि आपूर्ति श्रृंखला का पुनर्स्थापन (reshoring) यदि बहुत तेजी से किया जाए, तो वैश्विक GDP और व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।
विशेष रूप से तकनीकी उत्पाद, अर्धचालक, स्वास्थ्य उपकरण आदि क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवधानों का असर सीधा पड़ सकता है।
4. नीतिगत सुझाव और रणनीतियाँ
आगे बढ़ने के लिए कुछ नीतिगत कदम और सुझाव निम्न हैं:
कर्ज़ स्थिरता एवं अक्षम वित्तीय नीति
उच्च सार्वजनिक एवं निजी कर्ज़ को नियंत्रित करना
कर्ज पुनर्गठन (debt restructuring) एवं अनुकूल ब्याज दर नीतियाँ
वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा बढ़ाना
परिचालन रूप से जोखिम सीमित करना
बैंकों, नॉन-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों और देशों के बीच पारस्परिक जोखिम को प्रबंधित करना
व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन देना
मुक्त और नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था को मजबूत करना
द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय व्यापार साझेदारियों को जोड़ना
लक्षित विकास और निवेश
अवसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटलीकरण में निवेश बढ़ाना
नवाचार, उत्पादकता वृद्धि, छोटे एवं मध्यम उद्योगों (SMEs) को सशक्त करना
जलवायु एवं आपदा तैयारी
जलवायु‑अनुकूल नीतियाँ, हरित ऊर्जा, आपदाओं से तैयारी
लचीलापन (resilience) बढ़ाने वाली परियोजनाएं
सहयोग और बहुपक्षवाद
वैश्विक संस्थानों जैसे IMF, WTO, UN आदि के साथ सहयोग मजबूती से करना
साझा मंचों पर नीति समन्वय बढ़ाना
5. निष्कर्ष
वैश्विक अर्थव्यवस्था वर्तमान में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। झटकों और चुनौतियों के बीच भी लचीलापन दिखने लगा है, जो आशा देता है कि दुनिया पूरी तरह मुसीबतों में न फँसे। लेकिन यह लचीलापन स्थिर नहीं है — इसके पीछे जोखिम अभी भी मौजूद हैं, और यदि ध्यान नहीं रखा जाए, तो वे आगे रहे संदेहास्पद दबाव बन सकते हैं।
इसलिए, नीतियों को समय रहते सुधारना, जोखिमों की निगरानी करना, और क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। दुनिया को आगे बढ़ने के लिए यह आवश्यक है कि हम साहसिक कदम उठाएँ लेकिन सतर्कता बनाए रखें।
