फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन शुरू हो गया है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता वैश्विक चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं। सम्मेलन में भारत सहित कई आमंत्रित देशों के शीर्ष नेताओं की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
जी-7 समूह में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान शामिल हैं। हालांकि भारत इस समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भारत को विशेष आमंत्रित देश के रूप में लगातार बुलाया जा रहा है। यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और आर्थिक शक्ति को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं और विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम निर्धारित है।
सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, भू-राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति तथा वैश्विक आर्थिक चुनौतियां भी बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं।
भारत के लिए यह सम्मेलन कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर भारत अपनी आर्थिक उपलब्धियों और विकास मॉडल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा, वहीं दूसरी ओर निवेश, व्यापार और तकनीकी सहयोग के नए अवसरों पर भी चर्चा करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उसकी बढ़ती भूमिका को और मजबूत करेगी।
जी-7 शिखर सम्मेलन से निकलने वाले निर्णयों और घोषणाओं का असर विश्व अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक सहयोग पर पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया भर के नीति निर्माताओं, निवेशकों और आम नागरिकों की नजरें इस महत्वपूर्ण सम्मेलन पर बनी हुई हैं।
