केंद्र सरकार ने देश के बड़े बंदरगाहों पर बढ़ती कंटेनर भीड़ और लॉजिस्टिक समस्याओं को दूर करने के लिए एक उच्चस्तरीय पैनल का गठन किया है। सरकार का मानना है कि बंदरगाहों पर कंटेनर जाम की वजह से आयात-निर्यात गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, जिससे व्यापार और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है। नए पैनल का उद्देश्य इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना और माल ढुलाई प्रक्रिया को तेज एवं सुचारु बनाना है।
सूत्रों के अनुसार इस समिति में बंदरगाह, जहाजरानी, रेलवे, सड़क परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। पैनल देश के प्रमुख बंदरगाहों की स्थिति की समीक्षा करेगा और कंटेनर मूवमेंट में आने वाली बाधाओं की पहचान करेगा। इसके अलावा माल की तेज आवाजाही, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जाएगा।
हाल के महीनों में कई बड़े बंदरगाहों पर कंटेनरों की संख्या बढ़ने से माल की निकासी में देरी देखी गई थी। इससे उद्योगों को कच्चा माल समय पर नहीं मिल पा रहा था और निर्यातकों को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ रहा था। व्यापारिक संगठनों ने भी सरकार से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग की थी।
सरकार का कहना है कि बंदरगाहों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए रेलवे और सड़क नेटवर्क को भी मजबूत किया जाएगा ताकि कंटेनर तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकें। साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पैनल प्रभावी तरीके से काम करता है तो भारत के व्यापार और निर्यात क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है। इससे बंदरगाहों पर भीड़ कम होगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और देश की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
