नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक केस की सुनवाई के दौरान मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए आरोपी को बेल दिया। कोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि, किसी आरोपी के जल्द सुनवाई के अधिकार को, उस पर लगे आरोपों की गंभीरता के कारण छीना नहीं जा सकता है। सुनवाई में अगर देरी होता है तो वह जमानत का हकदार होगा, यह उसके मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने सुनवाई के दौरान हैरानी जताई। दरअसल, उत्तर प्रदेश में हत्या के एक मामले में एक विचाराधीन कैदी पिछले नौ सालों से जेल में बंद है। इस बात की जानकारी होते ही कोर्ट ने उसे पहली ही सुनवाई में जमानत दे दी और राज्य सरकार की राय भी नहीं मांगी, जो कि किसी मामले का फैसला करने का सामान्य तरीका नहीं है।
