पंजाब में बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर आज बुलाए गए बंद का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों को बंद करने का कोई सामान्य आदेश जारी नहीं किया गया, लेकिन निजी विद्यालयों के संगठनों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने संस्थान बंद रखने का निर्णय लिया है। वहीं सरकारी विद्यालयों को खुले रखने का निर्देश दिया गया है।
कौमी इंसाफ मोर्चा ने आज सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक पंजाब बंद का आह्वान किया है। बंद के दौरान बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और परिवहन सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों और विद्यालय कर्मचारियों को आने-जाने में परेशानी हो सकती थी। इसी को देखते हुए पंजाब के निजी विद्यालयों के एक प्रमुख संगठन ने 21 अगस्त को छुट्टी घोषित करने का निर्णय लिया।
दूसरी ओर, शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों को खुले रखने की बात कही है। शिक्षा सचिव सोनाली गिरी ने स्पष्ट किया कि सरकारी स्तर पर विद्यालयों और महाविद्यालयों को बंद करने के संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। सरकारी विद्यालयों में सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखने की व्यवस्था की गई है।
इस फैसले के कारण अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच कुछ समय तक असमंजस की स्थिति भी बनी रही। अलग-अलग विद्यालयों की ओर से अलग सूचनाएं आने के कारण अभिभावकों को अपने विद्यालय से सीधे जानकारी लेने की सलाह दी गई। निजी विद्यालयों में छुट्टी का फैसला सुरक्षा और परिवहन संबंधी संभावित परेशानियों को देखते हुए लिया गया है।
बंद के दौरान अस्पताल, दवा की दुकान और अन्य आवश्यक सेवाओं को अलग रखा गया है। प्रशासन ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से स्थिति बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। पंजाब में विद्यालयों को लेकर यह अलग-अलग व्यवस्था बताती है कि बंद का असर संस्थानों के प्रकार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है। अभिभावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि वे अपने विद्यालय की ओर से जारी आधिकारिक सूचना को ही अंतिम मानें।
