नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली सरकार ने झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति-2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस नीति के तहत दिल्ली में रहने वाले लगभग चार से पांच लाख परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे करीब 20 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार की इस पहल का उद्देश्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित और बेहतर आवास उपलब्ध कराना है।
मौजूदा जगह के आसपास ही मिलेगा नया मकान
नई पुनर्वास नीति में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि पात्र परिवारों को उनकी मौजूदा झुग्गी बस्ती में ही मकान देने को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि उसी स्थान पर पुनर्वास संभव नहीं हुआ तो सरकार तीन किलोमीटर के दायरे में वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को अपने रोजगार, बच्चों के स्कूल और आसपास की जरूरी सुविधाओं से दूर न जाना पड़े।
नीति के तहत पात्र परिवारों को एक बेडरूम, हॉल और रसोई वाला यानी एक बीएचके मकान दिया जाएगा।
स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी
सरकार की योजना केवल मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। पुनर्वास के तहत विकसित होने वाली आवासीय कॉलोनियों में स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाएं और बच्चों के खेलने के लिए मैदान भी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। दिव्यांग सदस्यों वाले परिवारों को भूतल पर मकान देने में प्राथमिकता मिलेगी।
इसके अलावा, नए आवासीय परिसरों में बिजली, पानी, साफ-सफाई और सुरक्षा जैसी सुविधाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी सरकार पहले पांच वर्षों तक उठाएगी।
कंप्यूटर आधारित लॉटरी से होगा मकानों का आवंटन
पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मकानों का आवंटन कंप्यूटर आधारित लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। पात्र परिवारों की सूची तैयार करने, दस्तावेजों की जांच और शिकायतों के समाधान के लिए भी व्यवस्था बनाई जाएगी।
नीति के अनुसार, एक जनवरी 2025 से पहले स्थापित झुग्गी बस्तियों के पात्र निवासियों को वैकल्पिक आवास दिए बिना हटाने का प्रावधान नहीं है। हालांकि, मकान पाने के लिए निर्धारित पात्रता और दस्तावेजों की शर्तें पूरी करना जरूरी होगा।
इस नीति से राजधानी में झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवारों को स्थायी आवास मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
