दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंध लागू होने के बाद सीएनजी वाहनों की मांग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजधानी में खराब होती हवा के बीच लोग ऐसे वाहनों को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहे हैं, जिनसे प्रदूषण अपेक्षाकृत कम होता है। इसका असर वाहन बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। खासतौर पर निजी कारों, टैक्सियों और व्यावसायिक वाहनों में सीएनजी विकल्प को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु गुणवत्ता अक्सर खराब होने लगती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। इसी वजह से सरकार और संबंधित एजेंसियां लोगों को स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करती रही हैं।
सीएनजी वाहनों को क्यों मिल रही प्राथमिकता?
सीएनजी से चलने वाले वाहन पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में कुछ प्रदूषक तत्व कम उत्सर्जित कर सकते हैं। इसके अलावा कई परिस्थितियों में सीएनजी का परिचालन खर्च भी कम पड़ता है। यही कारण है कि रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालक और टैक्सी संचालक इस विकल्प में रुचि दिखाते हैं।
हालांकि, सीएनजी वाहनों की वास्तविक लागत और बचत वाहन के मॉडल, ईंधन की कीमत तथा रोजाना तय की जाने वाली दूरी पर निर्भर करती है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने पर प्रशासन निर्माण गतिविधियों, वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने पर जोर दे रहा है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की भी आवश्यकता बताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल सीएनजी वाहनों की संख्या बढ़ाने से दिल्ली की हवा पूरी तरह साफ नहीं हो सकती। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, निर्माण स्थलों की धूल नियंत्रित करना और पराली जलाने जैसी घटनाओं पर रोक लगाना भी जरूरी है।
आने वाले समय में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों और स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों की मांग पर वाहन बाजार की नजर रहेगी।
