गुजरात में वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी चोरी के मामलों में पिछले तीन वर्षों के दौरान बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच कुल 17,588 जीएसटी चोरी के मामलों का पता चला, जिनमें लगभग 18,491 करोड़ रुपये की कर चोरी शामिल है। सबसे अधिक वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 में सामने आई, जब अकेले एक वर्ष में 12,632 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी गई।
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में गुजरात में 1,796 मामलों में लगभग 2,549 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी गई थी। इसके बाद 2024-25 में मामलों की संख्या बढ़कर 3,281 हो गई और लगभग 3,310 करोड़ रुपये की कर चोरी सामने आई। वहीं 2025-26 में मामलों में अचानक बड़ा उछाल आया और 12,511 मामलों में 12,632 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी गई।
इस वृद्धि ने कर प्रशासन और राजस्व निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। जीएसटी चोरी से सरकार के राजस्व पर सीधा असर पड़ता है। कर चोरी के कारण सरकारी खजाने को नुकसान होता है, जिससे विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों पर भी असर पड़ सकता है।
मामले में विपक्ष ने भी सरकार और कर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इतनी बड़ी राशि की कर चोरी सामने आना निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता को दर्शाता है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों और संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
दूसरी ओर, देशभर में जीएसटी से जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट धोखाधड़ी के मामले भी चिंता का विषय बने हुए हैं। केंद्र सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों ने 30,162 इनपुट टैक्स क्रेडिट धोखाधड़ी के मामलों का पता लगाया, जिनमें लगभग 74,782 करोड़ रुपये शामिल थे। गुजरात और महाराष्ट्र ऐसे राज्यों में रहे जहां बड़ी संख्या में मामले सामने आए।
अब गुजरात में कर चोरी रोकने के लिए डिजिटल निगरानी, फर्जी कारोबार और संदिग्ध लेन-देन की पहचान तथा जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि ईमानदार कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाए।
