भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की इस सप्ताह होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक पर वित्तीय बाजार, उद्योग जगत और आम उपभोक्ताओं की निगाहें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार केंद्रीय बैंक प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं कर सकता। महंगाई की स्थिति, आर्थिक विकास की रफ्तार और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई के मौजूदा नीति रुख को बरकरार रखने की संभावना जताई जा रही है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि हाल के महीनों में खुदरा महंगाई में कुछ नरमी देखने को मिली है, लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में आरबीआई किसी भी बड़े निर्णय से पहले घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतकों का सावधानीपूर्वक आकलन करना चाहेगा।
यदि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होता है तो गृह ऋण, वाहन ऋण और अन्य प्रकार के कर्ज की ब्याज दरों में तत्काल किसी बड़े परिवर्तन की संभावना कम रहेगी। इससे ईएमआई का बोझ फिलहाल यथावत रह सकता है। वहीं, उद्योग जगत और निवेशकों को उम्मीद है कि आरबीआई आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रित रखने के बीच संतुलित नीति अपनाएगा।
शेयर बाजार और विदेशी निवेशक भी आरबीआई के फैसले पर नजर बनाए हुए हैं। मौद्रिक नीति के साथ जारी होने वाले आर्थिक अनुमान, महंगाई के पूर्वानुमान और विकास दर से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ब्याज दर ही नहीं, बल्कि आरबीआई की भविष्य की नीति संबंधी टिप्पणियां भी निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगी।
बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर प्रेस वार्ता के माध्यम से मौद्रिक नीति के प्रमुख निर्णयों और उनके पीछे के कारणों की जानकारी देंगे। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई नियंत्रित दायरे में बनी रहती है और आर्थिक गतिविधियां संतुलित गति से आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले महीनों में आरबीआई परिस्थितियों के अनुसार अपनी नीति में आवश्यक बदलाव पर विचार कर सकता है। फिलहाल बाजार को स्थिर और संतुलित मौद्रिक नीति की उम्मीद है।
