न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा सप्ताह के दौरान भारत और अमेरिका के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ऊर्जा और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास पर चर्चा हुई। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने रिन्यू और यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम के सहयोग से ‘यूएस-इंडिया पार्टनरशिप: पावरिंग द एआई इकोनॉमी’ विषय पर एक गोलमेज बैठक आयोजित की। इसमें उद्योग, शिक्षा, निवेश, सरकार और नागरिक समाज से जुड़े 40 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में एआई और डेटा केंद्रों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। चर्चा का एक प्रमुख विषय भारत और अमेरिका के बीच डेटा केंद्र तथा एआई बुनियादी ढांचे में निवेश को बढ़ाना रहा। इसके साथ ही एआई आधारित बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए विश्वसनीय और मजबूत विद्युत आपूर्ति तथा बिजली ग्रिड की तैयारी पर भी विचार किया गया।
प्रतिनिधियों ने सीमा-पार ऊर्जा और डिजिटल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक, निजी और मिश्रित वित्त जुटाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसके अलावा दोनों देशों के बीच नीतिगत, नियामकीय और तकनीकी ढांचे में बेहतर तालमेल स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य एआई से जुड़े निवेश और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
बैठक में भारत की ओर से नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी समेत कई वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश अघी, विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा और रिन्यू के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमंत सिन्हा भी चर्चा में शामिल रहे।
एआई के विस्तार के साथ बिजली और डिजिटल बुनियादी ढांचे की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग आने वाले समय में एआई आधारित निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।
