राजधानी दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजर है। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधिमंडल शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन का आयोजन भारत मंडपम में किया जा रहा है।
सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई प्रमुख नेता हिस्सा ले रहे हैं। खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित मुलाकात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी उत्सुकता है। भारत और चीन के बीच सीमा, व्यापार और आर्थिक संबंधों से जुड़े मुद्दों को देखते हुए इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्रिक्स के मंच पर वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, वित्तीय सहयोग, तकनीक, विकास और वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों और विभिन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह सम्मेलन विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्रिक्स अब 11 सदस्य देशों का समूह है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसका प्रभाव लगातार बढ़ा है।
सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी की गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने कई स्तरों पर सुरक्षा घेरा तैयार किया है। बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के जरिए निगरानी की जा रही है।
विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही को देखते हुए दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और मार्ग परिवर्तन लागू किए गए हैं। दिल्ली यातायात पुलिस ने लोगों से यात्रा की योजना पहले बनाने और आवश्यकता होने पर मेट्रो का इस्तेमाल करने की अपील की है।
ब्रिक्स सम्मेलन भारत के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे में सम्मेलन से होने वाली द्विपक्षीय बैठकों और संभावित समझौतों पर भी दुनिया की नजर बनी हुई है।
