मध्य-पूर्व में एक बार फिर बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार, 9 सितंबर को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के बेहद करीब पहुंच गई। शुरुआती कारोबार में ब्रेंट वायदा करीब 99.33 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल 94.34 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। यह लगातार चौथा सत्र है जब तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
तेल कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह मध्य-पूर्व में संघर्ष का दोबारा तेज होना है। हाल के घटनाक्रमों में ईरान, अमेरिका, सऊदी अरब और यमन से जुड़े पक्षों के बीच सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। ईरान समर्थित हूती समूह ने सऊदी अरब के कई शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। इसके जवाब में क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बढ़ी है। इन घटनाओं ने निवेशकों और तेल कारोबारियों के बीच आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ा दी है।
मध्य-पूर्व दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां किसी भी बड़े संघर्ष का असर केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो सकती है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि यह वैश्विक तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है। महंगा कच्चा तेल आयात बिल बढ़ा सकता है और रुपये पर दबाव डाल सकता है। हाल में तेल की तेजी के बीच भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ता है तथा तेल आपूर्ति या समुद्री परिवहन लंबे समय तक प्रभावित होता है, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। फिलहाल वैश्विक बाजार की नजर क्षेत्र में होने वाले अगले घटनाक्रमों और कूटनीतिक प्रयासों पर बनी हुई है।
