वाशिंगटन। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से जुड़ा विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में आगे बढ़ गया है। इस विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। भारत भी संभावित रूप से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है।
यह विधेयक ‘लिंडसे ओ. ग्राहम प्रतिबंध रूस और ईरान अधिनियम, 2026’ के नाम से आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने मंगलवार को 214-211 मतों से एक प्रक्रियात्मक प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिससे विधेयक को सदन में आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ। अब विधेयक पर अंतिम मतदान की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उससे जुड़े राजस्व पर दबाव बढ़ाना है। प्रस्ताव में रूस के साथ व्यापार करने वाले कुछ देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था भी शामिल है। अमेरिकी सांसदों की ओर से पेश किए गए एक संशोधन में भारत समेत कई देशों को संभावित शुल्क के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है।
हालांकि, अभी भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क लागू नहीं हुआ है। विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी भी आवश्यक होगी। साथ ही, शुल्क लगाने का अंतिम निर्णय राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में रहेगा। इसलिए मौजूदा स्थिति को संभावित शुल्क के प्रस्ताव के रूप में देखा जा रहा है, न कि भारत पर लगाए जा चुके शुल्क के रूप में।
भारत लंबे समय से रूस से कच्चे तेल की खरीद कर रहा है। भारत का कहना रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा और देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेल खरीद के फैसले लिए जाते हैं। दूसरी ओर, अमेरिका रूस की ऊर्जा आय को लेकर प्रतिबंधों के जरिए दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
इस घटनाक्रम से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और दोनों देशों के बीच चल रही आर्थिक बातचीत पर भी असर पड़ने की संभावना को लेकर चर्चा बढ़ी है। हालांकि, विधेयक की अंतिम स्थिति और उसके बाद अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि भारत पर वास्तव में कोई अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है या नहीं।
