देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक State Bank of India (SBI) द्वारा सामने लाए गए आंकड़ों ने बैंकिंग और डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में 6,300 करोड़ रुपये से अधिक के बैंकिंग फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए हैं। यह जानकारी एक सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन के माध्यम से सार्वजनिक हुई, जिसके बाद बैंकिंग क्षेत्र में साइबर सुरक्षा और ग्राहक जागरूकता पर चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ-साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है। UPI, इंटरनेट बैंकिंग, फर्जी लिंक, फिशिंग ईमेल और नकली कॉल के जरिए ठग लोगों को निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में अपराधियों ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर ग्राहकों से संवेदनशील जानकारी हासिल की और उनके खातों से रकम निकाल ली।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने जहां लेन-देन को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए भी नए अवसर पैदा किए हैं। बढ़ते फ्रॉड मामलों से यह स्पष्ट होता है कि तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी बेहद जरूरी है।
बैंकिंग विशेषज्ञों ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे कभी भी अपना OTP, PIN, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। इसके अलावा संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अज्ञात मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने से भी बचने की सलाह दी गई है।
SBI ने भी ग्राहकों को समय-समय पर सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना बैंक या साइबर हेल्पलाइन को देने की अपील की है। बैंक का कहना है कि डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार नए सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं।
