नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और चीन द्वारा रेयर अर्थ धातुओं (Rare Earth Elements) के निर्यात पर नियंत्रण के बीच, भारत सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। देश अब रेयर अर्थ धातुओं का राष्ट्रीय भंडार (Stockpile) तैयार करने की योजना बना रहा है, ताकि भविष्य में इन आवश्यक खनिजों की आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
रेयर अर्थ मेटल्स क्या हैं और क्यों हैं ये महत्वपूर्ण?
Rare Earth Elements (REE) वे 17 दुर्लभ धातुएं हैं जो इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरणों, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी में उपयोग की जाती हैं। इनमें से कुछ प्रमुख धातुएं हैं:
नियोडियम (Neodymium)
प्रासियोडियम (Praseodymium)
डिस्प्रोसियम (Dysprosium)
टेरबियम (Terbium)
चीन फिलहाल इन धातुओं की सप्लाई का लगभग 60–70% नियंत्रित करता है, जिससे वैश्विक स्तर पर असंतुलन बना हुआ है।
भारत की नई रणनीति: आत्मनिर्भरता और सुरक्षा
भारत सरकार के अनुसार:
भारतीय खनन कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों को रेयर अर्थ्स के भंडारण के लिए अधिकृत किया जाएगा।
मिनरल एक्सप्लोरेशन और माइनिंग प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी दी जाएगी।
निजी और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नीतियों में सुधार किया जाएगा।
भारत के पास पहले से मौजूद रेयर अर्थ संसाधनों की खोज और खनन को प्राथमिकता दी जाएगी — खासकर राज्यों जैसे झारखंड, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में।
क्यों ज़रूरी है यह कदम?
चीन पर निर्भरता कम करने के लिए
सेमीकंडक्टर्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने हेतु
आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूती देने के लिए
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करने के लिए
भारत के पास कितना पोटेंशियल है?
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार, भारत में कई क्षेत्रों में रेयर अर्थ्स के प्रचुर भंडार मौजूद हैं।
अब तक इन संसाधनों का दोहन सीमित रहा है, लेकिन नई नीति से इनका व्यावसायिक दोहन तेज होगा।
अंतरराष्ट्रीय नजरिए से भारत की स्थिति
अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ पहले से ही रेयर अर्थ आपूर्ति के लिए भारत के साथ साझेदारी की इच्छा जता चुके हैं।
इससे भारत को रणनीतिक और आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
निष्कर्ष
भारत द्वारा रेयर अर्थ धातुओं का भंडार बनाना केवल एक आर्थिक फैसला नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और तकनीकी भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम है। आने वाले वर्षों में भारत, रेयर अर्थ की वैश्विक सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनकर उभर सकता है।
