दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नौकरी छूटना या वित्तीय विवाद पति को भरण-पोषण के वैधानिक दायित्व से मुक्त नहीं करते, यदि उसके पास पर्याप्त आय क्षमता थी। कोर्ट ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद किया, जिसमें भरण-पोषण जनवरी 2019 से देने का निर्देश था।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने माना कि वित्तीय लेन-देन संबंधित विवाद भी पति को अपने आश्रितों के भरण-पोषण के वैधानिक दायित्व से मुक्त नहीं करते हैं। अदालत ने यह टिप्पणी एक पत्नी और उसकी दो बेटियों की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए कीं।

