दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से लोगों को झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे। यह कार्रवाई लंबे समय तक चली जांच और तकनीकी निगरानी के बाद की गई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी AI आधारित सॉफ्टवेयर और वॉयस क्लोनिंग तकनीक का उपयोग कर लोगों को फर्जी कॉल करते थे। कई मामलों में ठग पीड़ितों के रिश्तेदारों, बैंक अधिकारियों या सरकारी कर्मचारियों की आवाज की नकल करके उनसे संपर्क करते थे। इसके बाद उन्हें किसी आपात स्थिति, बैंक खाते की समस्या या आकर्षक निवेश योजना का झांसा देकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, बैंक खातों से जुड़ी जानकारी और डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय था और ऑनलाइन माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बना चुका है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक, ऑनलाइन निवेश प्रस्ताव या बैंक संबंधी जानकारी मांगने वाले संदेशों पर तुरंत विश्वास न करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक जहां कई क्षेत्रों में लाभकारी साबित हो रही है, वहीं इसका दुरुपयोग साइबर अपराधों को अधिक जटिल बना रहा है। इस कार्रवाई को दिल्ली पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिसने तकनीक आधारित एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का समय रहते पर्दाफाश कर दिया।
