रक्षा मंत्री ने कहा है कि गुजरात आने वाले वर्षों में भारत का प्रमुख रक्षा विनिर्माण (डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग) हब बनने की पूरी क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि राज्य में मजबूत औद्योगिक आधार, आधुनिक बुनियादी ढांचा, बंदरगाहों की बेहतर सुविधा, निवेश के अनुकूल वातावरण और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हैं, जो रक्षा उत्पादन क्षेत्र के तेजी से विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। रक्षा मंत्री का यह बयान एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सामने आया, जहां उन्होंने देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य भारत को रक्षा उपकरणों के निर्माण और निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाना है। इसी दिशा में निजी कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्टार्टअप्स तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को रक्षा उत्पादन से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की नीतियों का उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीक के विकास को बढ़ावा देना और विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करना है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि गुजरात में पहले से ही कई औद्योगिक परियोजनाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं और अब रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में भी बड़े निवेश की संभावनाएं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में स्थापित होने वाली नई रक्षा उत्पादन इकाइयों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही, इससे भारत की रणनीतिक क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी।
उन्होंने उद्योग जगत से रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर लागू होती हैं, तो गुजरात न केवल देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में उभरेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
