नई दिल्ली।
यत्र गंगा च यमुना। यत्र प्राची सरस्वती।
यत्र सोमेश्वरो देवः तत्र माममृतं कृधी।
इन्द्रायेन्दो परिस्त्रव॥
अर्थात.. जहां गंगा और यमुना की धाराएं बहती हैं, जहां अदृश्य रूप से सरस्वती का प्रवाह आज भी चेतना को स्पर्श करता है और जहां स्वयं देवों के देव महादेव (स्वामी सोमेश्वर) विराजमान हैं- वह स्थान केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा का आद्य केंद्र है। हे प्रभु! इस पवित्र स्थान पर अमृत्व प्रदान करें।

इस श्लोक के मायने अत्यंत गहरे और दूरगामी हैं। यह श्लोक इस बात का भी सबूत है कि सोमनाथ मंदिर मानव इतिहास, लिखित स्मृतियों और सत्ता-परिवर्तनों से भी पहले से उस पवित्र भूमि पर विद्यमान रहा है, जिसका उल्लेख इसमें किया गया है।
आज हम मंदिर पर हुए उस पहले आक्रमण की 1000वीं स्मृति को याद कर रहे हैं, जब आक्रांता महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। छह टन से ज्यादा सोना लूटकर ले गया था। श्लोक याद दिलाता है- 1000 साल पहले महमूद ने मंदिर तबाह किया। इसके बाद कई और विदेशी आक्रमणकारियों ने मंदिर खंडहर में बदला। इसके बावजूद आस्था नहीं टूटी।
समुद्र की लहरों के साथ सांस लेता, समय की मार सहकर भी अडिग खड़ा सोमनाथ मंदिर आज भी आस्था का वह शाश्वत केंद्र है, जहां विनाश पराजित हुआ और विश्वास विजयी रहा। यह मंदिर केवल एक संरचना नहीं, बल्कि हजारों वर्षों के संघर्ष, स्वाभिमान और पुनर्जन्म की जीवित कथा है। यह पत्थर और गारे से नहीं, श्रद्धा, विश्वास और संकल्प से मजबूत व झगमग है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: 11 जनवरी को पीएम मोदी जाएंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व एवं समारोह’ में भाग लेने जा रहे हैं। जहां मदिर परिसर में तैयारियां अंतिम चरण में है तो दूसरी ओर देश भर में सोमनाथ की अखंडता, आत्मसम्मान, आस्था और संघर्ष की गौरवगाथा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।
