गांधीनगर। गुजरात की राजधानी गांधीनगर में आयोजित विश्व परिपत्र अर्थव्यवस्था मंच 2026 में दुनिया के 65 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने इसे वैश्विक स्तर का महत्वपूर्ण आयोजन बना दिया है। दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में 2,000 से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य संसाधनों के बेहतर उपयोग, कचरे में कमी और टिकाऊ आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
आयोजन में सरकारों, उद्योग जगत, शोध संस्थानों, पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान परिपत्र अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की जा रही है। इसमें संसाधनों के पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण, टिकाऊ उत्पादन, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
परिपत्र अर्थव्यवस्था ऐसी आर्थिक व्यवस्था को बढ़ावा देती है जिसमें वस्तुओं और संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाता है तथा उपयोग के बाद उन्हें दोबारा उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करने का प्रयास किया जाता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने के साथ कचरे की मात्रा घटाने में मदद मिल सकती है।
गांधीनगर में हो रहे इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को भारत की बढ़ती भूमिका के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच नीतियों, तकनीक और व्यावहारिक उपायों को लेकर विचारों का आदान-प्रदान हो रहा है। उद्योग जगत के लिए भी यह आयोजन नए सहयोग और निवेश के अवसर पैदा कर सकता है।
सम्मेलन में पर्यावरण के साथ आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और संसाधनों की मांग के बीच पारंपरिक उत्पादन और उपभोग के तरीकों में बदलाव जरूरी है।
65 से अधिक देशों की भागीदारी और 2,000 से ज्यादा प्रतिनिधियों की मौजूदगी से सम्मेलन को वैश्विक सहयोग के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यहां होने वाली चर्चाओं और संभावित समझौतों का असर टिकाऊ विकास से जुड़ी नीतियों पर पड़ सकता है।
