दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 3 सितंबर को 50 नई शून्य-उत्सर्जन इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन बसों के संचालन से राजधानी में सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ने के साथ प्रदूषण कम करने की कोशिश को भी बल मिलने की उम्मीद है। नई बसों के साथ दिल्ली-रेवाड़ी अंतरराज्यीय ई-बस सेवा की शुरुआत भी की गई है।
नई इलेक्ट्रिक बस सेवा का सबसे बड़ा लाभ दिल्ली और रेवाड़ी के बीच नियमित रूप से यात्रा करने वाले यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। दिल्ली-एनसीआर के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन करते हैं। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन के इस नए विकल्प से यात्रियों को निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों के साथ चार्जिंग ढांचे को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया है। इस अवसर पर हसनपुर और गाजीपुर में दो नए सार्वजनिक विद्युत वाहन चार्जिंग केंद्र भी शुरू किए गए। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचे का विस्तार होगा और भविष्य में ऐसी बसों तथा अन्य विद्युत वाहनों की संख्या बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना सरकार की प्राथमिकता है। इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ राजधानी में वायु प्रदूषण को कम करना भी है।
इस कार्यक्रम में तेहखंड स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। इस केंद्र में हर वर्ष करीब 72 हजार वाहनों की फिटनेस जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। सरकार का कहना है कि बस सेवा, चार्जिंग केंद्र और वाहन जांच जैसी परियोजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाकर दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और टिकाऊ बनाया जा रहा है।
