भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में छात्र रिषिकेश कुमार की मृत्यु के मामले को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन फिलहाल रोक दिया गया है। छात्रों ने यह निर्णय मामले की जांच पूरी होने तक प्रदर्शन स्थगित रखने के उद्देश्य से लिया है। 23 अगस्त से जारी इस आंदोलन में छात्र निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और छात्रावास तथा छात्र कल्याण व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे।
रिषिकेश कुमार की 22 अगस्त को संस्थान परिसर में मृत्यु हुई थी। वह भौतिकी में स्नातकोत्तर विद्यार्थी थे। उनकी मृत्यु के बाद छात्रों में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू किया। छात्रों का आरोप था कि रिषिकेश को छात्रावास, पढ़ाई और संस्थागत सहायता से जुड़ी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है और घटना की परिस्थितियों को लेकर अलग से कार्रवाई भी की जा रही है।
छात्रों की प्रमुख मांग मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की रही है। इसके अलावा वे उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं, जिनकी भूमिका जांच में सामने आए। छात्रों ने छात्रावास की सुविधाओं में सुधार, सुरक्षित वातावरण और विद्यार्थियों के लिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था की मांग भी उठाई है। आंदोलन के दौरान परिसर में छात्रों की बड़ी सभाएं और मार्च भी हुए थे।
विवाद के बीच संस्थान प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता कर रही हैं। छात्रों को उम्मीद है कि समिति मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्षता से जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। वर्तमान जानकारी के अनुसार समिति से 5 सितंबर तक रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
छात्रों द्वारा आंदोलन रोकने के बाद अब सबकी नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है। छात्रों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और संतोषजनक रही तो आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर तय की जाएगी। इस घटनाक्रम ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
