पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर 27 अगस्त को राज्यव्यापी महाबंद और हड़ताल का आह्वान किया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार से कई दौर की बातचीत और आश्वासन के बावजूद उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ है। इसके चलते कर्मचारियों ने बड़े स्तर पर आंदोलन करने की तैयारी शुरू कर दी है।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में लंबित महंगाई भत्ते की किस्तों और बकाया राशि का भुगतान शामिल है। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और कर्मचारियों के वेतन से जुड़े पुराने मुद्दों का समाधान करने की मांग भी की जा रही है। कर्मचारी संगठनों ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों पर लागू वेतन व्यवस्था की भी समीक्षा करने की मांग उठाई है।
इसके साथ ही न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार मध्याह्न भोजन, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों को उचित वेतन और सेवा संबंधी सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके अलावा सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना को बहाल करने की मांग भी की जा रही है।
27 अगस्त के आंदोलन में विद्यालयों, महाविद्यालयों, प्रशासनिक कार्यालयों, बिजली विभाग, तहसील और राजस्व कार्यालयों सहित कई विभागों के कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना है। कर्मचारी संगठनों ने सामूहिक अवकाश लेकर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और धरना देने की तैयारी की है। इससे सरकारी कार्यालयों और कुछ सार्वजनिक सेवाओं के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी मांगें कई वर्षों से लंबित हैं और बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। वहीं पंजाब सरकार की ओर से कर्मचारियों के साथ बातचीत और लंबित मुद्दों के समाधान को लेकर प्रयास जारी रहने की बात सामने आई है।
इस आंदोलन के बीच राज्य सरकार के सामने कर्मचारियों की मांगों और वित्तीय दबाव के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। कर्मचारी नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि 27 अगस्त के बाद भी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण होगी।
