केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली स्थित सरकारी आवासों की मरम्मत और रखरखाव पर वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान करीब 92 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह आंकड़ा सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर सामने आया है। सरकारी आवासों पर खर्च की गई इस बड़ी राशि को लेकर अब सरकारी धन के इस्तेमाल और रखरखाव की व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली में सरकारी आवास उपलब्ध कराए जाते हैं। इन आवासों में समय-समय पर मरम्मत, रंग-रोगन, विद्युत व्यवस्था, पानी की पाइपलाइन, भवन की संरचना और अन्य आवश्यक रखरखाव से जुड़े कार्य कराए जाते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में इन कार्यों पर कुल खर्च करीब 92 करोड़ रुपये बताया गया है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, मंत्रियों के आवासों की मरम्मत पर होने वाला खर्च केवल सजावट या सामान्य बदलाव तक सीमित नहीं होता। पुराने सरकारी भवनों में समय के साथ कई तरह की तकनीकी और संरचनात्मक समस्याएं सामने आती हैं। बिजली, पानी, सुरक्षा व्यवस्था, छत, दीवारों और अन्य जरूरी सुविधाओं की मरम्मत के लिए सरकारी एजेंसियों को काम कराना पड़ता है।
हालांकि, इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद सरकारी आवासों के रखरखाव को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल भी उठ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले हर खर्च का उचित रिकॉर्ड और स्पष्ट विवरण उपलब्ध होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि मरम्मत कार्य वास्तविक आवश्यकता के आधार पर किए गए हैं और सरकारी धन का सही उपयोग हुआ है।
दूसरी ओर, सरकारी आवासों की मरम्मत को लेकर अधिकारियों का तर्क है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में सरकारी भवन पुराने हैं और उनकी नियमित देखभाल आवश्यक है। समय पर मरम्मत नहीं होने पर भवनों की स्थिति खराब हो सकती है और बाद में मरम्मत पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
आरटीआई से सामने आए 92 करोड़ रुपये के आंकड़े ने सरकारी आवासों के रखरखाव पर होने वाले खर्च को चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में इस खर्च से जुड़े विस्तृत विवरण और अलग-अलग आवासों पर खर्च की गई राशि सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। सरकारी धन के उपयोग को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
