जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने सोमवार को नियंत्रण रेखा के निकट स्थित तीतवाल क्षेत्र का दौरा किया और यहां ऐतिहासिक शारदा मंदिर पहुंचकर क्षेत्र की धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का जायजा लिया। उनका यह दौरा सीमावर्ती क्षेत्रों में न्यायिक और कानूनी सेवाओं की स्थिति को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीतवाल कुपवाड़ा जिले के सीमावर्ती इलाकों में स्थित है और लंबे समय से ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। शारदा मंदिर इस क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। मुख्य न्यायाधीश के मंदिर पहुंचने पर स्थानीय लोगों और संबंधित अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
दौरे के दौरान न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत तथा सीमावर्ती समुदायों से जुड़े विषयों को भी समझने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उन्हें क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी दी।
मुख्य न्यायाधीश का यह दौरा केवल धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने तीतवाल में कैंप अदालत और कानूनी सहायता केंद्र का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने लोगों को उपलब्ध कराई जा रही न्यायिक और कानूनी सहायता की व्यवस्था की जानकारी ली। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक न्यायिक सेवाएं आसानी से पहुंचाना इस तरह की पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य माना जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में न्यायिक संस्थानों और कानूनी सहायता की पहुंच बढ़ने से आम नागरिकों को काफी सुविधा मिल सकती है। कई बार दूरदराज के क्षेत्रों से लोगों को न्यायिक प्रक्रिया के लिए जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर कानूनी सहायता उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।
शारदा मंदिर का दौरा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा तथा संरक्षण को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है।
मुख्य न्यायाधीश के तीतवाल दौरे से न्यायिक सेवाओं के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। अधिकारियों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि ऐसे दौरे सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक तथा न्यायिक सुविधाओं को और मजबूत करने में मदद करेंगे।
