सावन मास के तीसरे मंगलवार यानी 18 अगस्त 2026 को मंगला गौरी व्रत मनाया जा रहा है। हिंदू धार्मिक परंपरा में सावन के मंगलवार को माता गौरी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती के गौरी स्वरूप की आराधना की जाती है। वर्ष 2026 में उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार मंगला गौरी व्रत 4, 11, 18 और 25 अगस्त को रखा जा रहा है।
मंगला गौरी व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार महिलाएं इस दिन व्रत रखकर माता गौरी की पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि तथा वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना करती हैं। नवविवाहित महिलाओं के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।
व्रत के दौरान महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और पूजा स्थल पर माता गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करती हैं। इसके बाद माता को पुष्प, अक्षत, रोली, सिंदूर, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं पारंपरिक तरीके से गौरी माता की पूजा कर व्रत कथा सुनती हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद धार्मिक विधि के अनुसार व्रत का समापन किया जाता है।
18 अगस्त को मंगला गौरी व्रत के साथ भौम प्रदोष का भी संयोग बताया जा रहा है। इस कारण भगवान शिव और माता गौरी की पूजा का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का पवित्र महीना है। इस दौरान श्रद्धालु मंदिरों में जाकर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। मंगला गौरी व्रत इसी आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि व्रत और पूजा की विधि तथा समय अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना उचित माना जाता है।
