संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की प्रमुख निवेश एजेंसियां भारत में अपने दीर्घकालिक निवेश को और बढ़ाने की दिशा में नई रणनीति पर काम कर रही हैं। दोनों देशों के बीच तेजी से मजबूत हो रहे आर्थिक और व्यापारिक संबंधों के बीच यूएई के संप्रभु निवेश कोष और अन्य निवेश संस्थान भारत के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों का आकलन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत यूएई के लिए सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में से एक बना रहेगा।
हाल के वर्षों में भारत और यूएई के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। दोनों देशों की सरकारें व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। इसी क्रम में यूएई की निवेश एजेंसियां दीर्घकालिक परियोजनाओं में भागीदारी बढ़ाने और भारतीय कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
जानकारों के अनुसार, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, विशाल उपभोक्ता बाजार, डिजिटल परिवर्तन, बेहतर कारोबारी माहौल और सरकार की निवेश अनुकूल नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी, स्मार्ट शहर, बंदरगाह, हवाई अड्डे, परिवहन नेटवर्क और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। इन क्षेत्रों में यूएई की कंपनियां और निवेश कोष सक्रिय रुचि दिखा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई के दीर्घकालिक निवेश से भारत में रोजगार सृजन, आधुनिक अवसंरचना का विकास, तकनीकी सहयोग और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है। वहीं भारतीय कंपनियों को भी वैश्विक पूंजी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।
भारत और यूएई के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बना रहा है। उम्मीद की जा रही है कि आगामी वर्षों में निवेश, व्यापार और नवाचार के क्षेत्र में यह सहयोग और व्यापक होगा, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
