देश में खेलों को स्वच्छ और पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग विधेयक को संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। इस विधेयक का उद्देश्य खेलों में प्रतिबंधित प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाओं (डोपिंग) के उपयोग पर प्रभावी रोक लगाना, खिलाड़ियों के लिए पारदर्शी व्यवस्था विकसित करना और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारत की एंटी-डोपिंग प्रणाली को और मजबूत बनाना है।
प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) और अन्य संबंधित संस्थाओं की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके तहत डोपिंग मामलों की जांच, नमूनों की परीक्षण प्रक्रिया, सुनवाई की व्यवस्था और खिलाड़ियों के अधिकारों से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किए जाने की संभावना है। साथ ही विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नियमों को लागू करने पर भी विशेष जोर रहेगा।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारतीय खिलाड़ियों के डोपिंग मामलों में वृद्धि ने देश की खेल छवि पर असर डाला है। ऐसे में एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना समय की आवश्यकता है। उनका कहना है कि केवल सख्त कानून ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के बीच जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि अनजाने में प्रतिबंधित दवाओं के सेवन जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
सरकार का मानना है कि इस विधेयक के लागू होने से भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में निष्पक्ष माहौल मिलेगा और खेलों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही दोषी पाए जाने वाले खिलाड़ियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ स्पष्ट कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी मजबूत होगा।
यदि यह विधेयक संसद से पारित होता है, तो भारत की एंटी-डोपिंग व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और देश वैश्विक खेल मानकों के अनुरूप एक अधिक विश्वसनीय और जवाबदेह खेल तंत्र स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाएगा।
