नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह सुधार के नाम पर किसी धर्म को खत्म नहीं कर सकता और आस्था व अंतरात्मा से जुड़े मामलों को न्यायिक बहस का विषय नहीं बनाया जा सकता।

शीर्ष अदालत ने साथ ही सवाल उठाया कि उत्तर भारत का कोई नास्तिक सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का अधिकार कैसे मांग सकता है? कोर्ट ने कहा कि मंदिरों में प्रवेश के अधिकार पर फैसला करते समय उसे यह भी देखना होगा कि अधिकार का दावा कोई आस्थावान कर रहा है या गैर-आस्थावान।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ जजों की संविधान पीठ ने ये टिप्पणियां सबरीमाला मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न धर्मों की धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे व सीमा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कीं।
