दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में एक चिकित्सक की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना में दो नाबालिगों के शामिल होने की बात सामने आई थी। दोनों आरोपी इलाज कराने के बहाने निजी अस्पताल पहुंचे और चिकित्सक के कक्ष में जाकर उन पर गोली चला दी। पुलिस के अनुसार, घटना के पीछे पहले से बनाई गई योजना की आशंका भी जताई गई थी।
यह वारदात दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जामिया नगर-कालिंदी कुंज क्षेत्र स्थित नीमा अस्पताल में हुई थी। पुलिस के मुताबिक दोनों किशोर रात करीब डेढ़ बजे अस्पताल पहुंचे। उनमें से एक ने पैर में चोट होने की बात कही और चिकित्सकीय सहायता मांगी। अस्पताल के कर्मचारियों ने उसकी चोट पर पट्टी की। इसके बाद दोनों चिकित्सक के कक्ष में पहुंचे। कुछ देर बाद एक आरोपी ने चिकित्सक पर गोली चला दी। गोली सिर में लगने से चिकित्सक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक चिकित्सक की पहचान जावेद अख्तर के रूप में हुई थी। वह यूनानी चिकित्सा पद्धति से मरीजों का उपचार करते थे।
पुलिस ने घटना के बाद अस्पताल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच में आरोपियों की गतिविधियों और अस्पताल आने-जाने से जुड़े सुराग जुटाने का प्रयास किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि वारदात अचानक हुई घटना के बजाय पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा हो सकती है। एक जांच के अनुसार, आरोपियों में से एक ने घटना से पहले अस्पताल की स्थिति और व्यवस्था की जानकारी लेने की कोशिश की थी।
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कई स्तर पर जांच शुरू की। पुलिस ने अस्पताल के कर्मचारियों और अन्य संभावित गवाहों से पूछताछ की तथा तकनीकी साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया।
इस घटना ने दिल्ली में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी। अस्पतालों में आने वाले मरीजों और उनके साथ आने वाले लोगों की पहचान तथा सुरक्षा जांच को लेकर भी सवाल उठे। घटना ने यह चिंता सामने रखी कि चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत चिकित्सकों और कर्मचारियों को आपराधिक घटनाओं से बचाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
