दुनिया की तेज़ी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और तकनीकी विकास के दौर में दुर्लभ खनिज तत्व (Rare Earth Elements) की माँग और महत्व लगातार बढ़ रहा है। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने दुर्लभ खनिजों का रणनीतिक भंडारण (Strategic Stockpiling) शुरू करने का फैसला किया है।
क्या होते हैं दुर्लभ खनिज (Rare Earth Elements)?
दुर्लभ खनिज वे 17 रासायनिक तत्व होते हैं जो आधुनिक तकनीक में बेहद आवश्यक हैं, जैसे:
मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी
इलेक्ट्रिक वाहन (EVs)
सोलर पैनल और पवन टरबाइन
रक्षा उपकरण और मिसाइल गाइडेंस सिस्टम
सेमीकंडक्टर और बैटरी तकनीक
इनका उपयोग बढ़ने के साथ ही विश्व व्यापार में इनकी रणनीतिक अहमियत भी बढ़ गई है।
भारत क्यों कर रहा है भंडारण?
चीन पर अत्यधिक निर्भरता
दुनिया के 85% से अधिक दुर्लभ खनिज चीन द्वारा प्रोसेस और निर्यात किए जाते हैं। किसी भी आपूर्ति संकट या व्यापारिक तनाव की स्थिति में भारत को भारी नुकसान हो सकता है।राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक
रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र की तकनीकों में ये खनिज अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के लिए इनका स्थिर भंडारण अनिवार्य हो गया है।ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition)
भारत जो तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रहा है, वहां सौर और पवन ऊर्जा में इन तत्वों की भारी ज़रूरत है।वैश्विक मांग में वृद्धि
आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर दुर्लभ खनिजों की मांग कई गुना बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भारत अपने भविष्य के लिए पहले से तैयार रहना चाहता है।
️ सरकार की क्या योजना है?
राष्ट्रीय भंडारण रणनीति (National Stockpiling Strategy) तैयार की जा रही है।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को इसमें भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है।
भारत में पाए जाने वाले दुर्लभ खनिजों की खनन और प्रोसेसिंग की क्षमता बढ़ाई जा रही है, विशेषकर आंध्र प्रदेश, झारखंड, राजस्थान और ओडिशा में।
विदेशों से रणनीतिक साझेदारियों के तहत दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते किए जा रहे हैं।
वैश्विक संदर्भ में भारत की स्थिति
अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ पहले ही रणनीतिक खनिजों का भंडारण शुरू कर चुके हैं।
भारत भी अब वैश्विक आपूर्ति शृंखला (supply chain) में सक्रिय भागीदार बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
निष्कर्ष
“Rare Earths” अब केवल तकनीकी या खनिज शब्द नहीं हैं, बल्कि ये भारत की आर्थिक, रणनीतिक और पर्यावरणीय नीति का महत्वपूर्ण स्तंभ बनते जा रहे हैं।
दुर्लभ खनिजों का यह भंडारण न केवल भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा, बल्कि हमें वैश्विक संकटों से भी सुरक्षित रखेगा।
