पंजाब में खरीफ और आगामी धान खरीद सत्र की तैयारियों के बीच अनाज भंडारण क्षमता को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी मुद्दे को गंभीर बताते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाने की मांग की है। मुख्यमंत्री का कहना है कि यदि समय रहते भंडारण और अनाज के उठान की व्यवस्था नहीं की गई, तो किसानों, खाद्य एजेंसियों और मंडी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र में कहा कि राज्य देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है और हर वर्ष लाखों टन गेहूं एवं धान की सरकारी खरीद की जाती है। लेकिन मौजूदा समय में कई गोदाम पहले से भरे हुए हैं, जिससे नई फसल के भंडारण के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि भारतीय खाद्य निगम और अन्य केंद्रीय एजेंसियां राज्यों से अनाज के उठान की प्रक्रिया में तेजी लाएं।
राज्य सरकार का कहना है कि यदि भंडारण संकट का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो मंडियों में नई फसल की खरीद प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है और परिवहन व्यवस्था पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि अस्थायी गोदामों की व्यवस्था, आधुनिक साइलो निर्माण और अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य मिलकर दीर्घकालिक योजना तैयार करें।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में समय पर अनाज का उठान और सुरक्षित भंडारण अत्यंत आवश्यक है। यदि गोदामों में पर्याप्त जगह नहीं होगी तो अनाज की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ खाद्यान्न की बर्बादी का भी खतरा बढ़ सकता है। इसलिए आधुनिक भंडारण व्यवस्था और तेज वितरण प्रणाली की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
इस बीच राज्य सरकार ने संबंधित विभागों और खरीद एजेंसियों को मंडियों की तैयारियां पूरी करने तथा उपलब्ध भंडारण क्षमता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि जल्द बैठक आयोजित होती है और आवश्यक निर्णय लिए जाते हैं, तो आगामी खरीद सत्र को सुचारु रूप से संचालित करने में मदद मिलेगी तथा किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
