बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनावों के साथ मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के ‘जुलाई नेशनल चार्टर 2025’ पर जनमत संग्रह हुआ। विशेषज्ञों ने 84-सूत्रीय सुधार पैकेज पर चिंता जताई है, जो 1972 के संविधान और देश के मूलभूत इतिहास को खतरे में डाल सकता है। इसकी वैधानिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वर्तमान संविधान में ऐसे जनमत संग्रह का प्रावधान नहीं है।

जनमत संग्रह में ‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर 2025’ नामक सुधार प्रस्तावों के लिए जनता की सहमति मांगी गई, जिसकी घोषणा यूनुस ने 17 अक्टूबर को राजनीतिक दलों और उनकी अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सहमति आयोग के बीच लंबे विचार-विमर्श के बाद की थी।
