दुनिया भर में सामाजिक कल्याण (Social Welfare) योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है। विशेष रूप से विकासशील देशों में सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संगठन मिलकर ऐसी नीतियां लागू कर रहे हैं, जो गरीब और कमजोर वर्गों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करें।
World Bank और United Nations की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक दुनिया की लगभग आधी आबादी किसी न किसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत आ चुकी है। इन योजनाओं में नकद सहायता (cash transfers), खाद्य सब्सिडी, स्वास्थ्य बीमा और रोजगार गारंटी कार्यक्रम शामिल हैं।
अफ्रीका और एशिया के कई देशों में डिजिटल तकनीक का उपयोग करके लाभार्थियों तक सीधे सहायता पहुंचाई जा रही है। उदाहरण के लिए, भारत में डिजिटल पहचान और बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से करोड़ों लोगों को सीधे आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे भ्रष्टाचार में कमी आई है और पारदर्शिता बढ़ी है।
इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के बाद कई देशों ने अपने सामाजिक सुरक्षा बजट में वृद्धि की है। लैटिन अमेरिका में ब्राजील और मेक्सिको जैसे देशों ने गरीब परिवारों के लिए नकद सहायता कार्यक्रमों का विस्तार किया है, जिससे लाखों लोगों को राहत मिली है।
हालांकि, अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। दुनिया की बड़ी आबादी अभी भी ऐसी योजनाओं से बाहर है, खासकर अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा (Universal Social Protection) को लागू करने के लिए सरकारों को अधिक निवेश और बेहतर नीतिगत समन्वय की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, सामाजिक कल्याण योजनाओं का विस्तार वैश्विक स्तर पर गरीबी कम करने और आर्थिक असमानता को घटाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो रहा है।
