गुजरात में ‘हूं नाथूराम’ नाटक के मंचन को लेकर बवाल जारी है। राजकोट के बाद अहमदाबाद में भी कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने नाटक के सेट पर तोड़फोड़ की। आयोजकों का दावा है कि नाटक गोडसे द्वारा गांधीजी के सम्मान को दर्शाता है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे महात्मा गांधी की जन्मभूमि पर अस्वीकार्य मानते हैं। जामनगर, सूरत और वडोदरा में भी विरोध की आशंका है।..

सोमवार को अहमदाबाद के दीनदयाल सभागार में ‘हूं नाथूराम’ नाटक का मंचन होना था, लेकिन कांग्रेस समर्थकों और एनएसयूआइ के कार्यकर्ताओं ने सभागार पहुंचकर नाटक के लिए बनाए गए सेट को तोड़ दिया।
एनएसयूआइ ने महात्मा गांधी जिंदाबाद, नाथूराम मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। राज्य के जामनगर, राजकोट, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा आदि शहरों में नाथूराम के जीवन पर बने नाटक के मंचन की तैयारी की गई थी। इसके टिकट ऑनलाइन बेचे गए।
आयोजकों का दावा है कि ऐतिहासिक नाटक में सच दिखाने का प्रयास किया गया है। गोडसे ने कभी भी गांधीजी का अपमान नहीं किया था। नाटक का विरोध करने वालों को यह बात समझाने के लिए आमंत्रित भी किया गया था, लेकिन वे कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।
